गुरुवार, 18 अगस्त 2016

एक मेडल की क़ीमत तुम क्या जानो.....

जहाँ चीन का दबदबा और जहाँ सिर्फ गोल्ड मेडल से  संतुष्ठी  मिलती हैं, जहाँ सिल्वर और ब्रॉन्ज़  मैडल की कोई कीमत नही होती। लेकिन भारत की बात कुछ और हैं। जब एक ब्रॉन्ज़ मेडल मिला तो यहाँ एक पर्व से कम नहीं हैं।

                लेकिन 132 करोर की  जनसंख्या फिर भी अब तक एक ही मेडल यह बात कुछ लापरवाही सी लगती हैं। 

               जब 1952 के सम्मर ओलम्पिक्स फिनलैंड के हेलसिंकी में आयोजित, उसमें चीन को एक भी मेडल नहीं मिला था। उस बार अमेरिका 40 गोल्ड, 19 सिल्वर और 17 ब्रान्झ, कुल 76 पदाकोंके साथ नंबर एक पर था। रूस 22 गोल्ड के साथ दुसरे नंबर पर था। और भारत एक गोल्ड और एक  ब्रान्झ के साथ 26 वे स्थान था।

     1960 का ओलम्पिक इटली के रोम खेला गया था। रूस पहले स्थान तो अमेरिका दुसरे स्थान पर था। भारत और चीन एक एक सिल्वर के साथ  32 वे स्थान पर थे।


    1964 के ओलम्पिक में भारत एक गोल्ड के साथ 24 वे स्थान पर था। इस बार चीन के ताइवान टीम को खाली  हाथ लौटना पडा। उसके बाद 1968 में भारत और  ताइवान चीन को एक एक ब्रान्झ मेडल से लौटना पडा। 1976 में चीन के ताइवान और भारत को खाली  हाथ लौटना पड़ा।

     जब 1984 में चीन 15 गोल्ड के साथ चौथे स्थान पर आ गया। भारत कोई भी मेडल नहीं ले सका।इसके बाद चीन कहता गया की रोक सके तो रोक लेना।


          अब दुनिया में चीन अमेरिका को पछाड़ने की तैयारी  में लगा हैं। क्या भारत  यह स्थान हासिल कर पायेगा ? इसके लियें  एक लम्बी और पूर्व नियोजित  योजना की जरुरत हैं, जो चीन ने अपनाई हैं।  क्या चीन के इस चौतरफा विकास को हम चुनौती दे सकते हैं?  क्या हमारी आनेवाली पीढ़ी गर्व से कह सकेगी 'मेरा भारत महान"। 


शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

कबाली एक उत्सव...

     आज २२ जुलाई २०१६ को स्पेशल क्या हैं?  हर जगह यात्रा का माहौल, जैसा की कोई उत्सव, सुबह सुबह सारे मल्टीप्लैक्स खोल दिए गए हो, जैसा की एक आनंद का पर्व, लेकिन क्या हैं यह पर्व? दोस्तों आज का खास  दिन यह हैं की सुपरस्टार रजनीकांत की कबाली रीलिज हो रही हैं। दक्षिण में यह किसी उत्सव से कम नहीं।
 
         रोज की तरह मैं ऑफिस के लियें निकल चुका था रास्ते में फोनिक्स मार्केट सिटी लगता हैं, मैं हर रोज़ ८:१५ के आस पास बंद रहता था, लेकिन आज कुछ हलचल दिखाई दे रही थी। जी हाँ यहाँ  कबाली का पहला शो सुबह ७:०० बजे शुरू हो चुका था।

              फिल्मों को इन नयी परिभाषा देने में दक्षिण के लोग सफल हो गएँ हैं, क्यूं की उनके लिए यही एक उत्सव हैं। बेंगलुरु का यह हाल हैं तो तमिलनाडु में क्या होगा?


बुधवार, 20 जुलाई 2016

नज़र लग गयी...

     
      एक बार मैं मेरे बॉस के साथ चाइना ट्रिप पर गया हुआ था। हम लोग शंघाई, रुयान सिटी और गुआंगझू का दौरा करने वाले थे। जब हम एयरपोर्ट पे फ्लाइट पकड़ते समय चेकिंग के दौरान बैग में का लाइटर निकाल लेते थे।  लेकिन अंदर आने के बाद मेरा बॉस मुझे कहता देख मेरा लाइटर सही सलामत हैं, और बैग से निकालकर दिखाते हुए कहता था, " देख भाई कभी भी मैं अपने पास दो लाइटर  रखता हूँ, जब भी चेकिंग में पूछता हैं मैं दो में से एक लाइटर दे देता हूँ "। 

                 थोड़ी देर में हम वेन्जु से गुआंग्झू के लिए रवाना हो रहे थे, तभी चेकिंग के दौरान  हमारे बॉस के बैग में से दोनों लाइटर निकाल लिए थे। हुआ ऐसा की बॉस ने जब एक लाइटर निकाल के दिया  तभी वहाँ के सिक्योरिटी ने दुसरा  लाइटर की मांग की। 

    बॉस ने मेरे तरफ तिरछी नज़र से देख कर कहा लगता हैं, तेरी ही नज़र लग गयी।