सोमवार, 4 अगस्त 2025

"पर्सनल" का स्थान "एच आर एम" ने लिया ...





             एक बार जब "एम् बी ए  मैनजमेंट कमिटी" की बैठक में यह हुआ की "पर्सनल" विभाग को बदल देंगे, इसका मतलब था की अब "पर्सनल डिपार्टमेंट" का नाम बदल कर "एच आर एम  डिपार्टमेंट "कर देना चाहिए। 

         इसका  कारण यह था की, पर्सनल डिपार्टमेंट का अर्थ,  यह था की इस नाम से आदमी को मशीन जैसा "ट्रीटमेंट" मिलता हैं। इस नाम से आदमी का अपमान होता हैं। यह अपमान "मैनजमेंट कमीटी" इसे सह नहीं सकता।   यह मानवाधिकार के खिलाप है। इसके बदले में हम "एच आर एम डिपार्टमेंट"  इस नाम से सम्भोदन होगा।  इस में प्रशिक्षण अदि सिखाया जायेगा। 

       "एच आर एम" में काम करने वाले लोग तो  ज्यादा बढ़ गए ।  पहले पर्सनल डीपार्टमेंट में लोग काम रहते थे।  कहने के लिए  एच आर डिपार्टमेंट है। लेकिन अभी भी काम वही है, जो की मशीन के जैसा है।  सिर्फ नाम बदल गया है।  काम तो अभी भी वही है।  आज हमारे आइ टी  इंडस्ट्री में नए लोगों को दस से बारह  घंटे काम में लिया जाता है। 

सिर्फ नाम बदला है, काम करने का तरीक़ा वही है। या उससे भी बुरा। 

शनिवार, 26 अक्टूबर 2024

दोस्ती का असली मतल.,..



एक छोटे से गाँव में गोपाल और राजू नाम के दो घनिष्ठ मित्र रहते थे। दोनों बचपन से साथ बड़े हुए थे और एक-दूसरे पर बहुत भरोसा करते थे। जहाँ एक जाता, दूसरा उसके पीछे-पीछे होता। उनकी दोस्ती पूरे गाँव में मिसाल थी।

एक दिन दोनों ने सोचा कि जंगल की सैर पर चला जाए। उन्होंने तय किया कि वे पहाड़ियों के पार वाले बड़े जंगल में जाएंगे। वहाँ की कहानियाँ उन्होंने बहुत सुनी थीं—खूबसूरत झरने, ऊँचे पेड़, और कई जानवर। दोनों बड़े उत्साह से जंगल की ओर निकल पड़े।

जंगल में कुछ दूर चलने के बाद वे मस्ती में गुनगुनाते और बातें करते जा रहे थे, तभी अचानक एक भालू उनके सामने आ गया। भालू को देखकर दोनों घबरा गए। उन्हें समझ नहीं आया कि अब क्या करें।

गोपाल को बचपन से पेड़ पर चढ़ने की आदत थी, इसलिए वह फुर्ती से पास के एक पेड़ पर चढ़ गया। लेकिन राजू को पेड़ पर चढ़ना नहीं आता था। उसने मदद के लिए गोपाल की ओर देखा, लेकिन गोपाल ने डर के मारे उसकी कोई मदद नहीं की।

राजू ने जल्दी से अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और उसे याद आया कि किसी ने कहा था, "भालू मरे हुए इंसानों को नुकसान नहीं पहुँचाते।" वह तुरंत जमीन पर लेट गया और साँस रोककर मरने का नाटक करने लगा। भालू उसके पास आया, उसे सूँघा, और फिर वहाँ से चला गया, यह सोचकर कि राजू मर चुका है।

भालू के जाते ही गोपाल पेड़ से उतर आया और हँसते हुए बोला, "भालू तुम्हारे कान में क्या कह रहा था?"
राजू ने गंभीरता से कहा, "भालू ने मुझसे कहा कि सच्चे दोस्त वही होते हैं जो मुसीबत के समय साथ न छोड़ें।"

यह सुनकर गोपाल को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने राजू से माफी माँगी और वादा किया कि आगे से वह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। राजू ने उसे माफ कर दिया, लेकिन उसने यह सबक भी सीख लिया कि सच्ची दोस्ती का मतलब केवल अच्छे समय में साथ रहना नहीं, बल्कि मुश्किल घड़ी में भी एक-दूसरे का साथ देना है।

इस घटना के बाद उनकी दोस्ती पहले से भी मजबूत हो गई, और अब दोनों न केवल साथ रहते थे, बल्कि एक-दूसरे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे।

सीख: सच्ची दोस्ती की पहचान मुसीबत के समय होती है।
- Chat GPT द्वारा प्रस्तुत

सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

लाइट चोरी : एक समस्या ...

       

    हर रोज की तरह मैं  बैंगलोर के बेनगनहल्ली 'लेक गार्डन'  में घूमने जाता था, आज भी सबरे ५:३० के आसपास 'लेक गार्डन' में गया लेकिन गार्डन का 'मेन गेट' बंद था।  

तभी एक आदमी वहां बैठा था, उसने मुझेसे कहा। " मॉर्निंग वाक के लिए आये हो क्या ?"

"हाँ मैं 'मॉर्निंग वाक' के लिए आया हूं।" मैंने जवाब दिया। 

उसने 'गेट' का 'लॉक' ओपन किया औरमैं अंदर प्रवेश करते समय उससे पूछा। 

"गार्डन को 'लॉक' क्यों लगाते हो ?"

"साहब यहां के 'लाइट्स' चोरी हो जाते हैं।  और कुछ 'लाइट्स' चोरी हो गई  हैं।"

मैंने कहा "उस तरफ से तो पूरा खाली हैं, कोई भी आ सकता हैं।"

"उधर मेट्रो का 'ब्लू लाइन' का  काम चल रहा हैं, इसलिए उस तरफ से खुला हैं।"  उसने जवाब दिया। 

         मैं मन ही मन में सोचने लगा, इतना अच्छा 'लेक गार्डन' बनाया हैं।  तालाब के 'साइड' में अच्छे 'वाकिंग पाथ', 'टॉयलेट रूम', एक कोने कसरत करने के 'इक्विपमेंट्स', 'सिक्योरिटी रूम', 'एलइडी लाइट्स' के खम्बे और  लोगो को बैठने के लिए 'बेंचेस'।  यानि सभी सुविधा से उपलब्ध। 

          कई देश ऐसे  हैं, जहां  किसान अपने  अपनी सब्जिया  सड़क किनारे एक 'बॉक्स' में रख कर जाते हैं, और उसके साथ  एक बॉक्स जिसको जो लेना हैं वो ले कर उसकी की कीमत का भुगतान करते हैं। बिना कोई देख रेख। अगर भारत में ऐसी  सेवाएं रखे तो सब्जी के साथ साथ ठेला और 'बॉक्स'  सब कुछ चोरी हो जाता हैं। 

         जिस देश में 'वंदे भारत ट्रैन' पे पथराव कर सकते हैं, जिस देश के ट्रैन में 'टॉयलेट' रूम में पानी का 'मग' 'चैन'  से बंधा हो, जिस देश में  दिल्ली जैसे शहर में सड़क के किनारे रखे गमले घर लेके जाते हैं,  यह भी एक भारत हैं।  इसकी वजह क्या हैं?  इसकी वजह सिर्फ शिक्षा नहीं इसकी वजह हैं राष्ट्र प्रेम। अगर देश हर एक नागरिक अपने देश को अपना घर समझ कर प्रेम करने लगेगा तभी यह मुमकिन हैं। अगर शीक्षा ही इसका कारण होता तो सुशिक्षित लोग दूसरे देश से रुपए ले कर बिकी हुई पत्रकारिता नहीं करते। 

सोमवार, 14 अगस्त 2023

Google bard AI द्वारा लिखित कहानी....


एक बार की बात है, एक छोटी सी लड़की थी जिसका नाम रीटा था. वह एक छोटी सी कस्बे में रहती थी, और वह बहुत ही अकेली थी. उसके कोई दोस्त नहीं थे, और उसकी माता-पिता हमेशा काम में व्यस्त रहते थे. एक दिन, रीटा पार्क में टहल रही थी जब उसे एक खरगोश मिला. खरगोश बहुत छोटा और प्यारा था, और रीटा उसे देखकर बहुत खुश हुई. उसने खरगोश को घर ले आई, और उसने उसका नाम बाज़ी रखा. बाज़ी और रीटा बहुत अच्छे दोस्त बन गए. वे हर समय साथ खेलते थे, और रीटा कभी भी अकेला नहीं महसूस करती थी. एक दिन, रीटा और बाज़ी पार्क में खेल रहे थे जब उन्होंने कुछ बच्चों को एक खरगोश का पीछा करते हुए देखा. बच्चे बाज़ी को पकड़ना चाहते थे, और रीटा बहुत डरी हुई थी. उसने बाज़ी को बचाने के लिए जो कुछ भी किया, वह किया, लेकिन बच्चे बहुत मजबूत थे. वे बाज़ी को पकड़ने में सफल रहे, और रीटा को बहुत दुख हुआ. अगले दिन, रीटा बाज़ी को वापस पाने के लिए पार्क गया. उसने बच्चों को बाज़ी को एक पेड़ पर बांधते हुए देखा. रीटा ने बच्चों को बाज़ी को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने रीटा को धमकी दी कि अगर वह नहीं भाग गई तो वे उसे चोट पहुंचा देंगे. रीटा बहुत डरी हुई थी, लेकिpkन वह नहीं भागी. उसने बच्चों को बाज़ी को छोड़ने के लिए कहा, और उसने कहा कि वह कभी भी उनके बारे में किसी को नहीं बताएगी. बच्चे आखिरकार मान गए, और उन्होंने बाज़ी को छोड़ दिया. रीटा बहुत खुश थी कि बाज़ी सुरक्षित है. उसने बाज़ी को घर ले आई, और उसने उसे कभी भी अकेला नहीं छोड़ा. बाज़ी और रीटा बहुत अच्छे दोस्त बन गए, और वे हमेशा एक साथ रहे.

From,

Google bard AI 



रविवार, 23 जुलाई 2023

ChatGPT द्वारा लिखीत एक कहानी ....


      एक बार की बात है, एक गांव में एक छोटे से बच्चे का नाम रमेश था। रमेश एक बहुत ही समझदार और उत्साही बच्चा था। उसके पास हर वक्त कुछ नया सीखने का जुनून था। उसके दिल में बचपन से ही एक सपना था कि वह अपने गांव के लोगों की मदद करेगा और उन्हें खुशियों का साथ देगा।

एक दिन, रमेश ने गांव के प्राकृतिक तालाब के पास एक वृक्ष लगाने का निर्णय लिया। उसने अपने मित्रों के साथ सहायता की और एक वृक्ष को उगाने के लिए काम शुरू किया। वह लगातार दो महीने तक उस वृक्ष की देखभाल करता रहा। वृक्ष के पौधे को पानी देने, उसे सुरक्षित रखने, और किसानों के साथ सहायता करने के लिए वह हर समय तैयार रहता।

धीरे-धीरे वृक्ष बढ़ता गया और उसमें फूल और फल आने लगे। लोगों को इसका उपयोग भोजन और औषधि के लिए करने में बड़ी सहायता मिली। रमेश की मेहनत और ईमानदारी ने उसे बहुत सम्मान कमाया। उसके योगदान ने गांव की खुशियों को दोगुना किया।

एक दिन, रमेश के वृक्ष पर एक सर्कस के कर्मचारियों ने नए परचम लगा रखे थे, जो गांव की यात्रियों को आकर्षित करने के लिए था। सर्कस वालों ने रमेश को वृक्ष की खूबसूरती की प्रशंसा की और उसे वाकई सहायता करने का सामर्थ्य दिखाया।

यह घटना रमेश के लिए एक महत्वपूर्ण सबक था। वह समझ गया कि छोटे कदमों से भी हम लोगों के जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं। उसने तत्परता और समर्पण से अपने सपने को पूरा किया और गांव वासियों के दिलों में विशेष स्थान बना लिया।

इस छोटी सी कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और मेहनत के साथ साथ छोटे कदमों को भी महत्व देने चाहिए। हमारे छोटे कदम हमें अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर करते हैं और हमें सफलता की राह दिखाते हैं।


गुरुवार, 20 जुलाई 2023

पैसा बोलता है....


फोन उठाते ही उधर से आवाज़ गुंजी ।  

"हैलो हां मैं तेरा दोस्त बोल रहा हुं, रमेश।"  मेरे दोस्त का बड़े अरसे के बाद फ़ोन आया। 

"कैसा हैं यार? इतने दिन कहां था?" मैंने जवाब दिया। 

"तेरा कैसा चल रहा है ? सब कुछ ठीक ठाक हैं ?" रमेश ने पूछ लिया। 

"और तेरा कैसा चल रहा है? बीवी बच्चे सब ठीक हैं ना? "मैंने पूछ  लिया। 

"सब  ठीक है, क्या बोलना यार मेरी  जॉब चली  गयी  हैं। मुझे कुछ रुपये चाहिए थे, ज्यादा नहीं सर  सिर्फ पचास हज़ार।" रमेश ने क्षमा का भाव लाते हुए पूछा।

"लगता है सिग्नल बराबर नहीं आ रहा हैं।"  मैंने फ़ोन से अपना मुह दूर करते हुए कहा और फ़ोन काट दिया।  और उसका नंबर ब्लॉक कर दिया। 

        इस घटना के बाद मेरे मस्तिष्क में पुरानी यादे तरंगो के भांति मेर मस्तिष्क में गूंजने लगे।  जब मेरे दोस्त को जरुरत थी, उसे हर बार मैंने रुपये उधार दिए थे, लेकिन वो लौटाने का नाम ही नहीं ले रहा थे ।  न सिर्फ उसे मैंने मेरे हर दोस्त की मदद की थी, उसमे से राजेश एक था, वही टाइम पे रुपये  लौटा ता था। लेकिन राजेश अभी मेरे से बात नहीं करता, क्यों की मैंने सिर्फ एक बार उसे रुपए देने से मना किया था, वो  भी मेरे पास उस समय रुपये नहीं थे।  क्यूं  की उस समय मेरा रुपया रमेश  पास अटका हुआ था। 

         अब मै दुनिया से एक बात तो सिख लिया था की तुम कितने बार मदद करो, लेकिन किसी वजह से एक बार मदद नही की तो आपकी पूरी मदद व्यर्थ हो जाती है। 

          शायद रिश्तो में  तो इससे बुरी बात होती हैं।  उनके बेटी, बेटा और पत्नी सभी लोग संपर्क करना बंद कर देते हैं। यह बात याद रखने की जरुरत हैं की, आप किसी से भी उधार लेते हैं तो अपने बच्चों को या पत्नी को ना बताये तो ही बेहतर होगा, और एक बात, अपने काम आप ही करें।  बच्चो से किसी से उधार मंगवाने की कोशिश ना करें। इससे यह होता हैं बच्चे मन एक कल्पना घर करने लगती हैं की समय पे उसने हमारी मदद नहीं की। लगता हैं अब हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं, क्यों की अपने बच्चे सिर्फ आपके बारे में सोचते हैं, रिश्तो के बारे में नही। 

 किसी ने  सच हो कहा था  पैसा बोलता हैं, बुलवाता हैं और बोलना बंद भी करवाता हैं। 

रविवार, 11 जून 2023

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन ऑस्ट्रलिया ने जीता या जितवाया ?

          जब भी कोई बड़ा मुक़ाबला होता हैं, तो न जाने भारतीय टीम को क्या हो जाता हैं पता नहीं।  जब भी टेस्ट मैच में जो टीम टॉस जीतती हैं वो पहले बैटिंग चुनती हैं।  क्यों की दूसरे और तीसरे दिन पिच ख़राब होता हैं। यह किस्सा हम बहुत से  क्रिकेट एक्सपर्ट से सुना होगा।  लेकिन हमारे कप्तान ने तो बॉलिंग चुन लिया। 


             जब बैटिंग करने उतरने वाली ऑस्ट्रेलिया ने पहले इनिंग में ४६९ रन बना दिए थे।  ऑस्ट्रेलिया  के पहले  तीन  विकेट  जल्दी गिर गए।   स्टीव स्मिथ और ट्राविस हेड  १२१  और १६३ रन बनाये।  उसके बाद और पहले आने वाले किसी भी बल्लेबाज ने ५० का अकड़ा भी नहीं छुआ।  ऑस्ट्रलिया ने ४६९ का स्कोर किया। 

            उसके बाद भारतीय टीम ने  रोहित  और  गिल  बैटिंग करने आये।  रोहित ने १५ रन के स्कोर पे और गिल १३ रन बनाकर आउट हो गए। उसके बाद विराट कोहली और पुजारा ने केवल १४ -१४ के निजी स्कोर पर आउट हुए।  सबसे ज्यादा राहणे  ने ८९ रन बनाये, जडेजा ने ४८, फाइनल स्कोर  २९६ रन बना लिए। भारत  १७३ रन से पीछे था। 

          दूसरे इनिंग में ऑस्ट्रेलिया ने २७०/८ रन बनाकर मैच  डिक्लेर करके भारत  ४४४ रन का लक्ष रखा।  उसके बाद जब भारत ने दूसरे इनिंग में  खेलकर २३४ रन बनाकर पबेलियन  लौटे।  इससे ऑस्ट्रलिया ने २०९ रनो से  वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियन जीत लिया।  

          इसमें किसकी गलती हैं ? क्या भारतीय बल्लेबाज और बॉलर दोनों ने फ़ैल साबित हुए हैं।  अगर बॉलिंग के जगह बैटिंग लेते तो मैच का रिजल्ट कुछ अलग ही होता।  इस लिए लगता हैं की ऑस्ट्रेलिया ने जीता नहीं जितवाया हैं। 

गुरुवार, 23 मार्च 2023

ऐसे जीतोगे "वर्ल्ड कप "?

     

  पहले
वन डे में ऑस्ट्रेलिया  का स्कोर १८८ रन पे आल आउट होने के बाद इंडिया ने हारते हारते १९१/५ से मैच जीत लिया  था।  दूसरे वन  डे  में भारत ने अपने हथियार दाल दिए।  २६ वोहरों में केवल ११७ रन बनाकर आउट हो गयी। अब  ऑस्ट्रेलिया  के सामने ११८ रन का लक्ष रखा।  केवल ११ वोहरों में १२१ रनो की पारी बिना कोई विकेट गवाएं जीत गयी।  

           दूसरे मैच के बाद भारतीय बल्लेबाजोसे  लगा था की भारतीय टीम तीसरे वन डे  में अपना डंका बजा देगी।  लेकिन हुआ उल्टा ही,  ऑस्ट्रलिया टी. हेड और एम् मार्श बतौर  मैच ओपन करने आये  ६८/१ टी हेड  हार्दिक पंड्या ने आउट कर के मैच में थोड़ी जान ला दी।  ७४ / २ विकेट, ८५ /३ विकेट, १२५/ ४, १३८/५, १९६/६ २०३/ ७, २४५/८ २४७/९ और  २६९/१० 

          सातवे विकेट के बाद  ४२ रनो का बड़ी साझीदारी मिली  यह भी एक मैच का टर्निंग पॉइंट रहा। और दसवे विकेट के लिए २२ रनो की साझीदारी ये भी बहुत ज्यादा थी।  भारत के सामने २७० रन का छोटा सा लक्ष रखा।  

          अगर रोहित शर्मा ने दो डीआरएस लिए  होते तो मैच का हाल कुछ और ही होता। इससे यह दर्शाता हैं आपके पास वो किल्लर इंस्टिंक्ट नहीं है जो की धोनी के पास था।  विराट कोहली ने सर्वाधिक  ५४ रन बनाये  वो भी ७२ बॉल में।  हार्दिक पंड्या ने ४० बॉल में ४० रन जो दूसरा सर्वाधिक स्कोर था , मैच तो कोहली ने ही हरा दी थी ७२ बॉल में ५४ रन बनाकर। एक के बाद एक सभी भारतीय विकेट गिरते चले गए २४८ /१०  वो भी  ४९. १ वोहरों में। 

         क्या भारतीय टीम किसी परेशानी का सामना कर रही हैं?  विराट का बल्ला चल नहीं रहा फिर भी उसे मैच में जगह मिली हैं।  रोहित के पास वो किल्लर इंस्टिंक्ट नहीं हैं जो की मैच जीतना ही हैं।  क्या हम यही टीम लेकर वो डी आइ  वर्ल्ड कप  में उतरने वाले हैं।  क्या ऐसे जीतोगे वर्ल्ड कप ???

शनिवार, 18 मार्च 2023

"ACCESS DENIED"


     दो दिन के अंतराल  के बाद आज काम का दिन था।  वर्क फ्रॉम होम ही चल रहा था।  इस महीने की सैलरी आने के बाद घर और कार के लोन की किश्ते चुकानी थी। उसके साथ साथ क्रेडिट कार्ड का बिल भी।  जब मैं शुक्रवार  को दोस्तों के साथ होटल में पार्टी रखी थी, नई  कार  लेने की ख़ुशी में। जो की बैंक जमा राशि में से  लाख रूपये का  डाउन पेमेंट देकर ली थी।  मेरी इस ख़ुशी में बच्चे और बीवी शामिल नहीं थे।  बच्चों को छुट्टिया चल रही थी इस लिए वो अपने मायके गयी थी। यह सोचते सोचते मैंने जब लैपटॉप खोला तो ACCESS DENIED  मैसेज आया। मैंने आपने टेक्निकल टीम को फ़ोन मिलाने की लगा फिर मेरा फ़ोन कोइ उठया नहीं।  फिर मैंने HR को फ़ोन किया उसने कहा आप ऑफिस  आ  जाइये और आते समय आपका लैपटॉप  ले कर आना। 

         एक बड़े टेक्नीकल पार्क जहाँ  एक से बड़े एक इमारते जहाँ हजारों लोग काम करते थे। मैंने मेरे बिल्डिंग के बेसमेंट में कार पार्क की। और हमेशा की तरह लिफ्ट के पास आके खड़ा हो गया। जब मैं लिफ्ट को एक्सेस करने की कोशिश की तो वहां पर भी ACCESS DENIED  मैसेज आया।  फिर मैंने जिस रास्ते से कार बेसमेंट लाया था, उसी रास्ते से ऑफिस के रिसेप्सशन में गया। मैंने फिर से HR को फ़ोन मिलाया। थोड़ी देर  बाद HR मेरे पास आकर बोला।  आपको जॉब से निकाल दिया गया हैं।  आपका सेटलमेंट आपके बैंक अकाउंट में जमा होगा।  और डिटेल्स आपके पर्सनल मेल में।  अगर आप लैपटॉप और फ़ोन आपके पास रखना  चाहते हैं तो बता दीजियेगा। उसका अमाउंट आपके सेटलमेंट में से डिडक्ट होगा। 

       मैंने लैपटॉप और मोबाइल HR को  हैंड ओवर कर उसी रास्ते से कार की ओर  चल पड़ा।  और सोच रहा था की नया जॉब ढूंढना हैं। ऑफिस के बाहर आते आते रस्ते जो चाय की दुकान, पान  की टपरी सब वैसे ही चल रहा था।  जैसे  कुछ भी हुआ ही नहीं।  सिर्फ मेरी दुनिया बदल गयी थी, बाकी लोग तो मजे में जी रहे थे। 


शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

क्रीज़ से एक कदम दूर तो विश्व कप से दूर....

      जब  विश्व कप में भारतीय महिला टीम सेमीफइनल ऑस्ट्रेलिया महिला टीम के बिच चल रहा था।  ऑस्ट्रेलिया  ने  १७२ रन बनाकर भारतीय टीम के सामने १७३ रन का लक्ष रखा। शेफाली वर्मा और समृति मंधाना लक्ष को साधने हेतु मैदान में उत्तर जाते हैं।  वर्मा ९ रन बनाकर  और मंधाना २ रन बनाकर आउट हो जाते हैं। उसके बाद
 आनेवाली  यास्तिका भाटिया भी ४ रन बनाकर जल्दी ही आउट हो जाती हैं। उसके बाद आने वाली  जेमिमह रोडिऱ्गुस और हरमन प्रीत कौर  दोनों ने बाजी को संभल लिया। जब यह खिलाडी इतनी अच्छी बैटिंग कर के विरोधी टीम के पसीने छुड़वा दिए। एक समय ऐसा लग रहा था निर्धारित २० ओवर के अंदर ही मैच जीत लेते।  लेकिन एक गलत शॉट के चलते जेमिमहा २४ बाल ने ४३ रन बनाकर आउट होती हैं। उसके बाद ऋचा घोष बैटिंग करने उतरती हैं। हरमन प्रीत कौर कप्तानी पारी खेल रही थी। मैच में जब ऐसा मोड़ आया की ३४ बॉल में ५३ रन बनाकर रन आउट हो जाती हैं।  क्रीज से बस एक कदम दूर रह जाती हैं क्यूँ की उसका बल्ला जमीं में अटक गया था। उसके बाद  रनों  की गति धीमी हो जाती हैं।  १६७  रन  ८ विकेट  इस तरह मैच हार  कर विश्व कप के बहार हो जाती हैं। 
       
              अब हमारा सवाल यह हैं की,  मीडया  में जगह उतनी नहीं मिली की जितनी पुरुष टीम को मिलती।  बी सी सी आइ में भी उतनी  जगह नहीं मिली। अभी मालूम हुआ की हमारा मीडिया बी सी सी आइ  और हमारे  लोग अभी  भी पुरुष प्रधान सोच को ही बढ़ावा देते हैँ। महिला टीम को सिर्फ सुर्खियो मे जगह मिली।अगर इसी जगह पुरुष टिम होती तो एक एक घंटे के स्पेसल कार्यक्रम प्रसारित किये जाते लेकिन महिला टिम के ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। पूरी दुनिया  में बस पुरुषों का वर्चस्व दिखाई पड़ता हैँ।  अगर हम आज महिला टीम को उतनी अहमियत और प्रोहत्सन देते तो यह महिलएं पूरा विश्व जिंतने को तैयार रहती, विश्व कप तो उनके  सामने कुछ भी नहीं। 

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

२०२२ का साल आपको शुभ और मंगलमय हो....


          जीवन के सफर में चलते चलते पता ही नहीं चलता की समय हमें कैसे निगल रहा हैं।  हमें लगता हैं की हम समय के साथ बड़े हो रहे हैं।  लेकिन सत्त्य यह हैं की हम छोटे होते जा रहे हैं।  जैसा की एक और साल हमारे जीवन का कम हो गया, यानी की हम मृत्यु के और करीब हो गएँ हैं, यही जीवन का सत्य हैं। 

               एक एक पल, पल से मिनट, मिनिटों से घंटे, घंटो से दिन, दिनों से हप्ते, हप्तों से महीने, महीनो से साल, सालों से दशक, दशकों से शतक, शतकों से सहस्त्र, और अनेक सहस्र वर्षों से युग।  इस समय के हिसाब की कोई समय सिमा ही नहीं हैं।  

          समय देखने के लिए घडी होती है, दिन और महीने देखने के लिए कैलेंडर और हर साल में कैलेंडर बदल दिया जाता हैं।  नए साल का जश्न मनाते हैं।  क्या यह जश्न मृत्यु पे नजदीक आने का तो नहीं हैं ? लेकिन एक सवाल  क्या हम अंजाने में मृत्यु का जश्न तो नहीं मना रहें हैं?  जी नहीं, यह तो मृत्यु  का जश्न नहीं हैं, क्यों की हमें मृत्यु का समय पता नहीं होता।  

          हम जन्म का स्वागत तो नौ महीने से करते हैं।  लेकिन हमारी परम्परा  नहीं हैं के मृत्यु का भी स्वागत हो।   चलो जो भी हो हम नए साल का स्वागत करते हैं और सभीको नए साल की शुभकामनएं , २०२२ का साल आपको शुभ  और मंगलमय हो, यही भगवान से  प्रार्थना करतें हैं। 

शनिवार, 25 दिसंबर 2021

काला अक्षर भैंस बराबर.....

       


 क्लास रूम घुसते ही सभी छात्र गपशप में मग्न थे।  उतने में हिंदी के अध्यापक कक्षा में आएं, और चॉक से बोर्ड पर लिखने लगे। कहावतें--- लिखते लिखते कहने लगे  " बच्चों आज हम हिंदी की कुछ प्रचलित कहावते के बारें में सवांद करेंगे। बोर्ड पे लिखते लिखते बोलें  "काला अक्षर भैंस बराबर इसका मतलब बताओ " ?

सुरेश ( एक विधार्थी ) कहने लगा, सर आपने तो सफ़ेद अक्षर लिखा हैं, वो काला कैसा होआ गया ? 
शिक्षक ने सुरेश को बैठने को कहकर कहा " अरे यह तो मैंने बोर्ड पर लिखा हैं, काले बोर्ड पर सफेद चॉक से लिखा जाता हैं। "
सुरेश ने उठते हुए कहा  "लेकिन सर सफ़ेद अक्षर भैंस बराबर लिखना चाहियें था।"

टीचर ने कहा  "तुम्हारी नोट बुक क्या लिखा हैं ? उसमे काले अक्षर में लिखा नहीं हैं ? " 

"नहीं सर उसपे नीले अक्षर में लिखा हैं। क्या हम यह नहीं कह सकते की नीला अक्षर भैंस बराबर" सुरेश ने जवाब दिया।
  
टीचर ने  माथे पर बल लेकर कहा।  " समझ में नहीं आता यह कहावत हैं और इसका सही सही मतलब कौन बता सकता हैं। हाथ उप्पर करें। "

रमेश एक और छात्र ने कहा  "  सर भैंस भी काली होती हैं इसलिए काला अक्षर भैंस बराबर।  लेकिन सर सफेद अक्षर गाय  बराबर क्यों नहीं कह सकते ? क्यूँ की गाय सफ़ेद भी हो सकती हैं जैसे सफेद अक्षर की तरह। "

"चुप  रहो " टीचर ने गुस्से से कहा। और इस कहावत अर्थ बताने लगे।  

 काला अक्षर भैंस बराबर ' इस का क्या अर्थ होता हैं  की  इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ यह होता हैं की  'अनपढ़' होना है, ऐसा व्यक्ति जो मानसिक रूप से स्वयं को अशिक्षित मान ले एवं कोई भी शब्द पढ़ने या समझने में असमर्थ हो , उसके लिये काला अक्षर भैंस बराबर।"

"अगले क्लास में हम दूसरा मुहावरा का विवरण करेंगे " यह कहकर सर क्लास संपन कर निकल गए। 


गुरुवार, 2 सितंबर 2021

तिरंगा बेचता हुआ मासूम ...

   

    १३  अगस्त  को जब मैं  क्रोमा शॉप के सामने खड़े होकर मेरी बेटीसे बातचीत कर ही रहा था. उतने में एक लड़का तिरंगा बेचते हुए मेरे पास आ गया, और कहने लगा साहब एक तिरंगा लेलो, मुझे  २० रुपये  का आइस क्रीम खाना हैं।  मैं सोच में  पड़ गया की लोग पहले पेट भरने के लिए काम करते थे, लेकिन अब आइस क्रीम खाने के लिए। इतने में वह लड़का फिरसे  कहने लगा, "साहब ले लो ना यह  तिरंगे का मानचित्र ले लो जो गाड़ी में रखने के काम आएगा।"

         मैंने  उसे कहा  मैं तिरंगा तो मैं ले नहीं सकता लेकिन आइस क्रीम खिलाऊंगा, यह बोलकर जब मैंने आइस क्रीम  वाले ट्राली पे गया तो वो बच्चा वो बच्चा ६० रुपये की आइस क्रीम डिमांड करने लगा। फिर मैंने उसे कहा वहाँ तो तुम बोल रहे थे की २० रूपये का आइस क्रीम चाहियें।  मैंने उस ट्राली वालें से कहा भाई साहब २० रुपये वाली एक कैंडी आइस क्रीम देने  को कहा।  फिर उसने उसे बिस रूपये वाले कैंडी आइस क्रीम दे दी। मैंने फोन पे से २० रूपये का पेमेंट करवा दिया। 

      मैंने मासूम बच्चा समझकर उसके पास से  तिरंगा खरीदे बिना ही आइस क्रीम खिला दी। क्यों की जब मैं अगर तिरंगा खरीदने  के बाद  अगर तिरंगा  गलती से भी यहाँ  वहाँ गिरेगा और तिरंगे का सन्मान नहीं रहेगा। 

      देश की हालात इस तरह हैं की मासूम बच्चों को तिरंगा बेचना पड़ता हैं। हमें वो दिन लाना हैं किसी भी मासूम  बच्चे को कुछ भी बेचने का  या  कोई धंदा या काम ना करना पड़े। यही होगा देश और तिरंगे का सन्मान । 

(इमेज गूगल से.... )

मंगलवार, 12 जनवरी 2021

हरा "व्हाट्सअप " बना लाल तो नीला "सिग्नल" बना हरा....

     


           जब से "व्हाट्सअप"  ने नयी  पॉलीसी  लायी हैं तो सोशल मीडिया में एक हड़कंप सा छा गया हैं।  जब से "व्हाट्सअप" ने यह पॉलिसी लायी हैं तबसे "व्हाट्सअप" का दूसरा पर्याय ढूंढ़ने लगे हैं।  इस बिच टेस्ला के संस्थापक का ट्वीट ने तो "सिग्नल "आप को हरी झंडी  दिखा दी है।  इस बिच लोगों ने "सिग्नल"डाउनलोड करना ही दूसरे  विक्लप के रूप में देखने लगे हैं।  अब पॉलिसी  का विवरण इस तरह से हैं की आप का जो भी डाटा व्हाट्सअप पे सेव हैं, वो फेसबुक पे दिखायेगा अगर ये पालिसी किसी को मान्य नहीं तो आपका व्हटसअप अकाउंट बंद होगा। यह पॉलिसी नहीं बल्कि यह यूजर को चेतावनी दी गयी हैं। व्हाटअप, फेसबुक और इंस्टग्राम का मालिक एक ही हैं। 

         



 क्या यह व्हाट्सअप का अंत तो नहीं हैं ? जो ऐप दुनिया पे राज करता रहा हैं, उसका भी अंत तो होता ही  हैं। क्या व्हाट्सअप  के लिए यह लाल सिग्नल तो नहीं। जो नया सिग्नल की जो सिग्नल को हरा करा कर उसका रास्ता साफ हो गया। कुछ हो या ना हो लेकिन इस पॉलिसी से लोग दूसरा विकल्प ढूंढ़ने लगे हैं।  




शनिवार, 18 नवंबर 2017

गुजरात का "टेम्पल रन"...


     गुजरात के  मोबाइल में टेम्पल रन गेम डाउनलोड करना था। इस लिए हमें लोकशाही के प्ले स्टोर में जा के डाउनलोड किया।


       टेम्पल रन जो गेम हैं  वो रागा  और नमो के बिच में था। लेकिन नमो इसमें शामिल  नहीं हैं।  जो भी ज्यादा टेम्पल रन करेगा उसे ज्यादा पॉइंट्स यानि वोट मिलने वाले हैं, ऐसी रागा की सोच हैं।

        जब चुनाव आयोग ने टेम्पल रन का बटन दबाया  तो रागा ने रन करते करते  इन  मंदिरों से गुजर रहा था।   टेम्पल रन  की शुरुआत की। रन... रन... द्वारकाधीश मंदिर, ... रन... रन...  कागवाड में खोडलधाम,  रन...रन ... विरपुर के जलाराम मंदिर, रन...रन ...चोटिला टेंपल  रन...रन ... राजकोट में दासी जीवन टेंपल भी पार करते हुए पहला पड़ाव पार कर गए।  अब दूसरे पड़ाव का खेल में रन...रन ...  नादियाड के शांताराम मंदिर, रन...रन ...खेड़ा के रणछोड़ राय मंदिर रन...रन ... भाठीजी महाराज मंदिर, रन...रन ... पावगढ़ में महाकाली माता मंदिर पार कर गए।


       तीसरे पड़ाव के खेल में उन्होंने दक्षिण गुजरात को पार करते करते रहें। रन...रन ...नवसारी मेंरन..रन...रन ..रन ... उनई माता मंदिर गए। टेम्पल रन में दौड़ते दौड़ते गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर रन...रन ...मेहसाणा में बहुचराजी मंदिर,रन...रन ...वलीनाथ मंदिर, रन...रन ...वीर मेघमाया मंदिर रन...रन ... खोडियार मंदिर में भी से होते हुए रन  कर रहें हैं। 

        अब इस टेम्पल रन में कभी "विकास" पीछे पड़ जाता हैं तो कभी हिंदू वोटों का राक्षस। अब आप ही जरा सोचियें  क्या "विकास" पागल हो गया है? जी  नहीं "विकास" पागल नहीं हुआ हैं। क्यों की "विकास "कैसा हैं यह पलट कर देख नहीं सकते, उन्हें तो सिर्फ रन...रन ... करना हैं। पीछे मुड़कर देखने का वक्त ही कहाँ है ? अगर देखे तो "विकास" रनर को  निगल जाएगा और टेम्पल रन गेम का समापन होगा। 

रविवार, 1 अक्टूबर 2017

नम्मा मेट्रो में हिंदी भाषा नहीं चाहियें ...

बहुत दिनों के बाद आज "नम्मा मेट्रो"  में सफर करने को मिला ,जो बैंगलोर में  दौड़ती हैं।  जब मैं १९९६ में पहली बार बैंगलोर आया था तो तब ९ बजे  के बाद पूरा बैंगलोर बंद हो जाता था।  लेकिन जो बैंगलोर की प्रगति पथ पर हैं, उसके  लिए सिर्फ आई टी इंडस्ट्री  का बड़ा योगदान हैं।  आज शहर रात भर जागता हैं, रात भर जीता हैं और यहाँ की रंगीन रातें जो किसी मेट्रो शहर से कम नहीं हैं । 

      हमें इस्कॉन टेम्पल जाना था, इस लिए हमने "बायापनहल्ली" से  "सैंडलवुड सोप फैक्ट्री "स्टेशन जाना था जो  की  इस्कॉन के  नजदीक का रेलवे स्टेशन हैं।  सिर्फ बीच में मैजेस्टिक में रूट बदलना होता हैं। 

जाते समय  मैं एक अनुभव महसूस किया जो की हिंदी अनाउसमेंट बंद हो चुका था, मुझे अब  भी  याद हैं की जब मैं पहली बार मेट्रो में सफर किया था तब तो  हिंदी में अनाउसमेंट होता था जैसा की  "अगला स्टेशन स्वामी विवेकानंद रोड हैं", मैं मन ही मन सोचा था की सिर्फ  "अगला स्टेशन स्वामी विवेकानंद रोड " सिर्फ इतना ही काफी  हैं।  

  अब तो हिंदी पूरी तरह बंद हो चुकी थी  हर स्टेशन पर हिंदी के नेम प्लेट हटा दिए गए हैं, और कुछ जगह हिंदी नाम मिटा दिया गया हैं ।  क्या हम किसी भी भाषा की लिपि को मिटा सकते हैं,  लेकिन मन से नहीं, समाज से नहीं या देश से नहीं। हिंदी तो देश की भाषा हैं हम सबको सीखना चाहियें, किसी भी भाषा का अनादर क्यों ?

हम जिस प्रान्त में रहते हैं वहाँ की भाषा का आना जरुरी हैं, लेकिन किसी अन्य  भाषा को मिटाकर नहीं।  

ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಕನ್ನಡವೇ   ಆಢಳಿತ ಭಾಷೆ = कर्नाटकमें कन्नड़ ही अटूट भाषा। 


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गुरुवार, 18 अगस्त 2016

एक मेडल की क़ीमत तुम क्या जानो.....

जहाँ चीन का दबदबा और जहाँ सिर्फ गोल्ड मेडल से  संतुष्ठी  मिलती हैं, जहाँ सिल्वर और ब्रॉन्ज़  मैडल की कोई कीमत नही होती। लेकिन भारत की बात कुछ और हैं। जब एक ब्रॉन्ज़ मेडल मिला तो यहाँ एक पर्व से कम नहीं हैं।

                लेकिन 132 करोर की  जनसंख्या फिर भी अब तक एक ही मेडल यह बात कुछ लापरवाही सी लगती हैं। 

               जब 1952 के सम्मर ओलम्पिक्स फिनलैंड के हेलसिंकी में आयोजित, उसमें चीन को एक भी मेडल नहीं मिला था। उस बार अमेरिका 40 गोल्ड, 19 सिल्वर और 17 ब्रान्झ, कुल 76 पदाकोंके साथ नंबर एक पर था। रूस 22 गोल्ड के साथ दुसरे नंबर पर था। और भारत एक गोल्ड और एक  ब्रान्झ के साथ 26 वे स्थान था।

     1960 का ओलम्पिक इटली के रोम खेला गया था। रूस पहले स्थान तो अमेरिका दुसरे स्थान पर था। भारत और चीन एक एक सिल्वर के साथ  32 वे स्थान पर थे।


    1964 के ओलम्पिक में भारत एक गोल्ड के साथ 24 वे स्थान पर था। इस बार चीन के ताइवान टीम को खाली  हाथ लौटना पडा। उसके बाद 1968 में भारत और  ताइवान चीन को एक एक ब्रान्झ मेडल से लौटना पडा। 1976 में चीन के ताइवान और भारत को खाली  हाथ लौटना पड़ा।

     जब 1984 में चीन 15 गोल्ड के साथ चौथे स्थान पर आ गया। भारत कोई भी मेडल नहीं ले सका।इसके बाद चीन कहता गया की रोक सके तो रोक लेना।


          अब दुनिया में चीन अमेरिका को पछाड़ने की तैयारी  में लगा हैं। क्या भारत  यह स्थान हासिल कर पायेगा ? इसके लियें  एक लम्बी और पूर्व नियोजित  योजना की जरुरत हैं, जो चीन ने अपनाई हैं।  क्या चीन के इस चौतरफा विकास को हम चुनौती दे सकते हैं?  क्या हमारी आनेवाली पीढ़ी गर्व से कह सकेगी 'मेरा भारत महान"। 


शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

कबाली एक उत्सव...

     आज २२ जुलाई २०१६ को स्पेशल क्या हैं?  हर जगह यात्रा का माहौल, जैसा की कोई उत्सव, सुबह सुबह सारे मल्टीप्लैक्स खोल दिए गए हो, जैसा की एक आनंद का पर्व, लेकिन क्या हैं यह पर्व? दोस्तों आज का खास  दिन यह हैं की सुपरस्टार रजनीकांत की कबाली रीलिज हो रही हैं। दक्षिण में यह किसी उत्सव से कम नहीं।
 
         रोज की तरह मैं ऑफिस के लियें निकल चुका था रास्ते में फोनिक्स मार्केट सिटी लगता हैं, मैं हर रोज़ ८:१५ के आस पास बंद रहता था, लेकिन आज कुछ हलचल दिखाई दे रही थी। जी हाँ यहाँ  कबाली का पहला शो सुबह ७:०० बजे शुरू हो चुका था।

              फिल्मों को इन नयी परिभाषा देने में दक्षिण के लोग सफल हो गएँ हैं, क्यूं की उनके लिए यही एक उत्सव हैं। बेंगलुरु का यह हाल हैं तो तमिलनाडु में क्या होगा?


बुधवार, 20 जुलाई 2016

नज़र लग गयी...

     
      एक बार मैं मेरे बॉस के साथ चाइना ट्रिप पर गया हुआ था। हम लोग शंघाई, रुयान सिटी और गुआंगझू का दौरा करने वाले थे। जब हम एयरपोर्ट पे फ्लाइट पकड़ते समय चेकिंग के दौरान बैग में का लाइटर निकाल लेते थे।  लेकिन अंदर आने के बाद मेरा बॉस मुझे कहता देख मेरा लाइटर सही सलामत हैं, और बैग से निकालकर दिखाते हुए कहता था, " देख भाई कभी भी मैं अपने पास दो लाइटर  रखता हूँ, जब भी चेकिंग में पूछता हैं मैं दो में से एक लाइटर दे देता हूँ "। 

                 थोड़ी देर में हम वेन्जु से गुआंग्झू के लिए रवाना हो रहे थे, तभी चेकिंग के दौरान  हमारे बॉस के बैग में से दोनों लाइटर निकाल लिए थे। हुआ ऐसा की बॉस ने जब एक लाइटर निकाल के दिया  तभी वहाँ के सिक्योरिटी ने दुसरा  लाइटर की मांग की। 

    बॉस ने मेरे तरफ तिरछी नज़र से देख कर कहा लगता हैं, तेरी ही नज़र लग गयी। 

गुरुवार, 14 मई 2015

सल्लू की छूटी जेल, अम्मा को हुई बेल ...

 
         क्या भारत में न्याय  मिलना इतना आसान हो गया हैं ? क्या यह न्यायपालिका अमीरों के लिए तो काम नहीं कर रही हैं? जब सल्लू मियाँ  जेल से छूटे और अम्मा को बेल मिलने का जो वाकया हमारे अदालतों ने पेश किया हैं, वो हमें इस शक की वोर ले जाता हैं की न्याय सिर्फ अमीरों को ही मिलता हैं। 

  जब अम्मा के केस में सरकारी वकील को अपना पक्ष रखने  नही दिया गया, ऐसा सरकारी वकील का कहना हैं।  जब निचले अदालत में वही केस में कैसे सजा के पात्र बने और वही ऊपरी अदालत ने उन्हें छोड़ दिया। आय से अधिक सम्पति रखना भी गुन्हा हैं।  लोग यहाँ उन्ही लोगों को सरपर  बिठा रखते हैं, और उन्हें भगवान  का दर्जा देते हैं।  
 
           ठीक हैं सल्लू मियाँ  बदल गएँ हैं, अब वो अच्छे इंसान बन गए हैं। जो लोग इस हादसे के शिकार हुए थे क्या वो बुरे इंसान थे? क्या उन्हें इन्साफ नहीं चाहिए था।  ठीक हैं सल्लू मियाँ एक फ़िल्मी हस्ती हैं ना की भगवान। लेकिन कुछ लोग कलाकार को भी भगवान का दर्जा  देते हैं। 

          अब बात पते की यह हैं की दोनों भी फ़िल्मी हस्तियाँ हैं एक पहले फिल्मो में काम कर चुकी हैं, और एक अभी भी कर रहें हैं।