शनिवार, 10 जनवरी 2015

जरा शर्म करो 'आप' सभी...

जरा शर्म करो 'आप' सभी 
जुबान बंद होगी भी कभी 

जुबांसे  जब ये आग उगलता 
मीडिया को कुछ नहीं दीखता 
जागो  कदम उठाओ अभी 
जुबान बंद होगी भी कभी 

इसका कोई नहीं 'साक्षी'
मीडिया का तो  एक ही  साक्षी 
'साक्षी' का पीछा छोड़ो अभी
जुबान बंद होगी भी कभी  

मीडिया वालों ज़रा जागो 
जरा इसके पीछे भी भागो
हिम्मतसे दिखाओ इसे अभी  
जुबान बंद होगी भी कभी
जरा शर्म करो 'आप' सभी 
जुबान बंद होगी भी कभी

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

सुनंदा पुष्कर की मौत की कहानी ...

           
     
 दिल्ली पुलिस ने सुनंदा पुष्कर की हत्या के लिए अज्ञात व्यक्ति पे प्राथमिकी दर्ज की हैं। अब यह सवाल उठता हैं की, प्राथमिकी अज्ञात व्यक्ति के खिलाप क्यों? क्या यह सोची समझी साजिश  तो नहीं?
पुरे दुनिया को पता हैं की सुनंदा की मौत खुदखुशी नहीं बल्कि एक हत्या थी। लेकिन कानून को तो सबूत चाहियें। 

                 थोड़े दिनोंमें पता चल जायेगा की उसका हत्यारा कौन हैं? कहाँ हैं? कहते हैं की कानून के हाथ बहुत ही लम्बे होते हैं । इसी लम्बे हाथों  से उस कातिल के गलें में फास लगेगी या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा। 


 रेडियोएक्टिव पोलोनियम-210 यह एक रेडियोएक्टिव  केमिकल हैं।  एम्स रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुनंदा पुष्कर  की मौत पोलोनियम-210 से हुई। इसका इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में होता है। इसकी खोज मैडम क्यूरी एंड पेरी क्यूरी दपंती ने किया था न्यूक्लियर रिएक्टर्स में यूरेनियम की केमिकल प्रोसेसिंग से पोलोनियम बनता है। 138 दिन में यह पदार्थ आधा रह जाता है। इस केमिकल का अनालिसिस भारत में  नहीं हो सकता।

पहले यह क्यों बताया  गया की मौत ओवर डोस से हुयी ?
पहले यह क्यों बताया गया की पेट में दवा मिली हैं ?
इसके लियें कौन जिम्मेदार हैं? क्या हमारा सिस्टम इतना करप्ट हो चुका हैं की, हम उसे ठीक  ही नहीं कर सकते ?

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

केम्पे गौडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ……

     
    "नमस्कार अब हम थोड़ी ही देर में बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाइ अड्डे पर उतरने वाले हैं, बाहर का तापमान २५ डिग्री सेलसियस हैं।"  अब  इस घोषणा में  थोड़ा परिवर्तन होने वाला हैं। परिवर्तन के बाद घोषणा कुछ इस तरह होगी।

 "नमस्कार अब हम थोड़ी ही देर में बेंगलुरु  के केम्पे गौडा अंतरराष्ट्रीय हवाइ अड्डे पर उतरने वाले हैं, बाहर का तापमान २५ डिग्री सेलसियस हैं।" 

क्यूँ की अब बेंगलुरु हवाई अड्डे का नाम बदलने वाला हैं जो की केम्पे गौडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।

अब हम "केम्पे गौडा" के बारे में थोड़ा जान लेते हैं केम्पे गौडा का पूरा नाम हरिया केम्पे गौडा उनका जन्म १५१० में हुआ था और मृत्यु १५६९ में।
 केम्पे गौडा को बेंगलुरु नगर के निर्माता के रूप में जान जाता हैं। जो की उन्होंने किल्ले के बहार बड़ी सड़कें और बेंगलुरु शहर का आयोजन किया था। 

चलो अब हम मानकर चलते हैं की, अब बेंगलुरु का हवाई अड्डा केम्पे गौडा के नाम से जाना जायेगा। 

रविवार, 14 जुलाई 2013

"तार"तार हो कर टूट गयी …

 
         मैं तार बोल रहीं हूँ, एक ज़माना था जब लोग सिर्फ मेरे बल पर तत्काल सन्देश भेजकर लोग निश्चीत हुआ करते थे.   क्यूँ की मेरे बराबरी का कोई तोड़ नहीं था. मैं सब की लियें, सभी काम के लियें, काम करती थी, अब मेरा जीना मुश्किल हो गया था. क्यूँ की अब लोगों को मेरी जरुरत नहीं रही. अब इस आधुनिक युग में जहाँ  मोबाइल फोन से एस एम एस, इ-मेल यह सब पर मेरी अगली पीढ़ी ने कब्जा बनाया हैं, इस लियें अब मेरी उतनी जरूरत नहीं रही हैं. जाते जाते मैं यह कहना चाहती हूँ की, जो की मेरे काम का लेखा जोखा था जो मैं आपके साथ बाँटना चाहती हूँ. अगर किसी को शादी की बधाई, परीक्षा की सफलता या किसी की  मृत्यु यह सब समाचार तुरंत पहुचा देती थी.  


         १६२ साल  से मैं काम कर रहीं हूँ, लेकिन अब इस आधुनिक युग में मेरी धीमी चाल लोगों को पसंद नहीं हैं. आज ज़माना बहुत ही तेज़ हैं और मैं इस जमाने के साथ नहीं चल सकती इस लियें मैं इस काम से विदा ले रहीं हूँ. यह सब सोच कर मेरा दिल "तार" तार हो कर टूट गया हैं. मैं आज यानि १४ जुलाई २०१३ के बाद आपके सेवा से दूर जा रही हूँ, अब मैं सिर्फ एक इतिहास बनकर रह गयी हूँ. मेरे काम को देख कर कुछ लोग रो पड़े होंगे, कुछ लोग ख़ुशी से झूम गएँ होंगे, इसके लियें मैं सभीसे माफ़ी मंगाकर मेरी सेवा समाप्त करती हूँ. 

आभार
आपकी तार… 

शनिवार, 23 मार्च 2013

मुलायम मोम के गोंद की माया...

 
       मैं राजनीति  बोल रहीं हूँ ! मैं जीवन के जिस बुरे पड़ाव से गुजर रहीं हूँ,यह सब आपके साथ बांटना चाहती हूँ।  मैं आपको मेरे जीवन के कुछ उतार चढ़ाव के बारें में बताना चाहती हूँ। हमें 'ममता' की  ममता पर बहुत ही विश्वास  था, लेकिन क्या करे ? ' ममता' हमेंसे  ममता  किये बिना ही चली गयी।  कुछ दिन हम 'करुणा'  के दया से  चल रहे थे, लेकिन अब तो हम पर किसी की भी करुणा  नहीं आती। फिर हमने सोच लिया की, हम क्यूँ लोगों पर ममता दिखा दे, जो हमारें काम के नहीं रहें, अब  हम किसी पे क्यूँ करुणा दिखाएँ की जो हमें करुणा नहीं दिखतें? इस लिए अपना हथियार दिखाना पडा। 
   
        चलों कुछ हो ना हो 'मुलायम' मोम का गोंद बना कर  जोड़ चिपकाया  गया हैं, वो भी कितने दिन तक चलेगा पता नहीं? क्यूँ की हमने एक गलती जरुर की हैं इस 'मुलायम' मोम को हमने फेविकोल  समझ  कर चिपका तो  दिया है, लेकिन कब तक चलेगा पता नहीं। अब तो  मौसम ठंडा हैं मुलायम मोम पिघलने ने के लिए गर्म मौसम का इन्तजार हैं। जब भी मौसम गर्म होने लगेगा हमने सीबीआई का बर्फ तयार रखा हैं, क्यूँ की इस मुलायम मोम को ठंडा रखें। 

        'माया'  की बात कुछ और हैं उसे हम इस मायाजाल में इस तरह फंसाकर रखा हैं, जो की जब भी हमें लगता हैं की माया  इस मायाजाल से बाहर जाने के कोशिश करेगी तो सीबीआई के जाल में फंस जायेगी। इस लियें हम सब पर दया करुणा और ममता के बिना ही मुलायम मोम की माया के रिश्तों में जुड़ चुकें हैं, हम भी देखतें हैं की हमें कौन जुदा करता हैं ?
   
    अब मैं आपको यह बताना चाहती हूँ।  जब तक हमारें पास सीबीआई का साथ हैं, हम कुछ भी कर सकतें हैं। क्या अन्ना जैसें लोग हमें पागल समझ रखा हैं, जो  की हम हमारा हथियार किसी और को दे, नहीं !! कभी नहीं !! इसके बारें में सोचना भी नहीं। 
 
    आप लोग जरुर बताना, आपको कैसा लगा मुलायम मोम के गोंद की माया ...। 

आपकी 

राजनीति 


निचे दिए गए पते पर सम्पर्क करें। 

श्रीमती  राजनीति 
खुर्सी न. ४२०,  भ्रष्टाचार जनपथ 
लूटमार नगर, ४२०  ४२० 
मोबाइल   ९४२० ४२० ४२० 



शनिवार, 29 दिसंबर 2012

जनशक्ती

           
   यह जनशक्ती हैं जो सभी नेता लोगोकों शोक व्यक्त करने का मौक़ा मिला हैं, शायद दिल से ना सही लेकिन जनशक्ती का असर जरुर हैं। समझो अगर हम लोग सब इस आन्दोलन में नहीं होते तो यह घटना भी एक समाचार पत्र  या टीवी के किसी कोने में आकर चली जाती। इस लियें हमें अब यह सोचना होगा की हम सब एक हैं, और आनेवाले कल को बदलना हमारा केवल धर्म ही नहीं बल्की हमारा कर्तव्य भी हैं।

               अब शोक व्यक्त करने वाले नेता लोग दिल्ली में लोगों पर लाठिया, और आसूं गैस के गोले दागकर इस आन्दोलन का खात्मा करने का प्रयास जरुर किया हैं। क्यूँ की नेता लोग नहीं  चाहते की सभी लोग एक होकर सरकार या सिस्टम को खामिया उजागर करें और सरकार को  हिला  दें।


            चाहें कुछ भी हम सब एक हैं, हमें इस देश की गंदगी की को मिटाना हैं।  हम सब एक हैं, हमारी आवाज़ को सरकार मिटा नहीं सकती अब हमें औरतों का सन्मान करना होगा और उन अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी होगी,  आज वो दिन आ गया हैं, अब हमें हमारी आवाज़ को बुलंद  कर के उन दरिंदों को सजा देनी हैं ।  आज पूरा देश शोक में डूबा हैं। आज हमें सबको नेक काम के लियें एक होना हैं, जनशक्ती को जागृत करना हैं।  इसमें राजकरन ना हो क्यूँ की इससे जो एक सत्ता बने जो की हम इस देश में एक बदलाव आएँ और इस सड़े हुयें सिस्टम उखाड़ सकें।  मैं आदर के साथ प्रणाम करता हैं इस जनशक्ती को। चलों नेक काम के लियें एक होकर एक जनांदोलन खड़ा करेंगे, की दुनिया में एक मिसाल बने की  भारत का जनतंत्र सडा हुआ नहीं हैं।
                               हम सब एक हैं !हम सब एक हैं!!  हमारी जनशक्ती।

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

"हलकट जवानी"



एक दिन जब मैं सुबह सुबह ऑफिस जा रहा था, जाते जाते एफ एम रेडियो पर गाने चल रहे थे। एक आदमी ने फरमाइश के लिए  फोन किया ।

जब उनसे आर जे ने पूछा "हेलो आप कौन बोल रहे हैं?"

"मैं पवन बोल रहाँ हूँ"  श्रोता पवनने कहा|

"आप क्या करते हैं?" आर जे ने पूछा।

"मैं एक कंपनी में मैनेजर हूँ" पवन ने कहा।

" कहिएं आप कौनसा गाना सुनना पसंद करेंगे" आर जे ने पूछा।

"मैं हेरोइन का गाना पसंद करता हूँ, हलकट जवानी" पवन ने कहा।

"सुबह सुबह हलकट जवानी   याँद आ रहीं है, यह गाना किसे डेडीकेट करते हैं?" आर जे ने पूछा।

"मेरें  बच्चों के लियें" पवन ने कहा।   

"क्या करते हैं आपके बच्चें?" आर जे ने पूछा।

"मेरा एक बेटा सातवी  कक्षा में पढता हैं, और दुसरा दसवी कक्षा में पढता हैं" पवन ने कहा। 

"चलो आपकी पसंद का गाना सुनते हैं, हलकट जवानी, अगर आपको भी कोई गाना सुनना हैं तो हमें फोन कीजिएगा," आर जे ने गाना चालू किया।

    यह सब सुनने के बाद, मैं सोच में पड़ गया की, हमारें संस्कार भी इसी तरह हलकट होते जा रहें हैं।  फ़िल्मी गाने के साथ साथ माँ बाप को पता नही चल रहां हैं की कौनसा गाना सुने या ना सुने। एक जमानेमें हलकट शब्द का प्रयोग सिर्फ गाली देने के लियें इस्तमाल किया जाता था। क्या समय के साथ साथ शब्दों की परिभाषा भी बदल रहीं हैं?  जो भी हों हमें सोचना होगा और ऐसे शब्दों का इस्तमाल फ़िल्मी गानों में रोकना जरुरी हैं।