शनिवार, 25 फ़रवरी 2023
क्रीज़ से एक कदम दूर तो विश्व कप से दूर....
शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021
२०२२ का साल आपको शुभ और मंगलमय हो....
जीवन के सफर में चलते चलते पता ही नहीं चलता की समय हमें कैसे निगल रहा हैं। हमें लगता हैं की हम समय के साथ बड़े हो रहे हैं। लेकिन सत्त्य यह हैं की हम छोटे होते जा रहे हैं। जैसा की एक और साल हमारे जीवन का कम हो गया, यानी की हम मृत्यु के और करीब हो गएँ हैं, यही जीवन का सत्य हैं।
एक एक पल, पल से मिनट, मिनिटों से घंटे, घंटो से दिन, दिनों से हप्ते, हप्तों से महीने, महीनो से साल, सालों से दशक, दशकों से शतक, शतकों से सहस्त्र, और अनेक सहस्र वर्षों से युग। इस समय के हिसाब की कोई समय सिमा ही नहीं हैं।
समय देखने के लिए घडी होती है, दिन और महीने देखने के लिए कैलेंडर और हर साल में कैलेंडर बदल दिया जाता हैं। नए साल का जश्न मनाते हैं। क्या यह जश्न मृत्यु पे नजदीक आने का तो नहीं हैं ? लेकिन एक सवाल क्या हम अंजाने में मृत्यु का जश्न तो नहीं मना रहें हैं? जी नहीं, यह तो मृत्यु का जश्न नहीं हैं, क्यों की हमें मृत्यु का समय पता नहीं होता।
हम जन्म का स्वागत तो नौ महीने से करते हैं। लेकिन हमारी परम्परा नहीं हैं के मृत्यु का भी स्वागत हो। चलो जो भी हो हम नए साल का स्वागत करते हैं और सभीको नए साल की शुभकामनएं , २०२२ का साल आपको शुभ और मंगलमय हो, यही भगवान से प्रार्थना करतें हैं।
शनिवार, 25 दिसंबर 2021
काला अक्षर भैंस बराबर.....
क्लास रूम घुसते ही सभी छात्र गपशप में मग्न थे। उतने में हिंदी के अध्यापक कक्षा में आएं, और चॉक से बोर्ड पर लिखने लगे। कहावतें--- लिखते लिखते कहने लगे " बच्चों आज हम हिंदी की कुछ प्रचलित कहावते के बारें में सवांद करेंगे। बोर्ड पे लिखते लिखते बोलें "काला अक्षर भैंस बराबर इसका मतलब बताओ " ?
गुरुवार, 2 सितंबर 2021
तिरंगा बेचता हुआ मासूम ...
१३ अगस्त को जब मैं क्रोमा शॉप के सामने खड़े होकर मेरी बेटीसे बातचीत कर ही रहा था. उतने में एक लड़का तिरंगा बेचते हुए मेरे पास आ गया, और कहने लगा साहब एक तिरंगा लेलो, मुझे २० रुपये का आइस क्रीम खाना हैं। मैं सोच में पड़ गया की लोग पहले पेट भरने के लिए काम करते थे, लेकिन अब आइस क्रीम खाने के लिए। इतने में वह लड़का फिरसे कहने लगा, "साहब ले लो ना यह तिरंगे का मानचित्र ले लो जो गाड़ी में रखने के काम आएगा।"
मैंने उसे कहा मैं तिरंगा तो मैं ले नहीं सकता लेकिन आइस क्रीम खिलाऊंगा, यह बोलकर जब मैंने आइस क्रीम वाले ट्राली पे गया तो वो बच्चा वो बच्चा ६० रुपये की आइस क्रीम डिमांड करने लगा। फिर मैंने उसे कहा वहाँ तो तुम बोल रहे थे की २० रूपये का आइस क्रीम चाहियें। मैंने उस ट्राली वालें से कहा भाई साहब २० रुपये वाली एक कैंडी आइस क्रीम देने को कहा। फिर उसने उसे बिस रूपये वाले कैंडी आइस क्रीम दे दी। मैंने फोन पे से २० रूपये का पेमेंट करवा दिया।
मैंने मासूम बच्चा समझकर उसके पास से तिरंगा खरीदे बिना ही आइस क्रीम खिला दी। क्यों की जब मैं अगर तिरंगा खरीदने के बाद अगर तिरंगा गलती से भी यहाँ वहाँ गिरेगा और तिरंगे का सन्मान नहीं रहेगा।
देश की हालात इस तरह हैं की मासूम बच्चों को तिरंगा बेचना पड़ता हैं। हमें वो दिन लाना हैं किसी भी मासूम बच्चे को कुछ भी बेचने का या कोई धंदा या काम ना करना पड़े। यही होगा देश और तिरंगे का सन्मान ।
(इमेज गूगल से.... )
मंगलवार, 12 जनवरी 2021
हरा "व्हाट्सअप " बना लाल तो नीला "सिग्नल" बना हरा....
जब से "व्हाट्सअप" ने नयी पॉलीसी लायी हैं तो सोशल मीडिया में एक हड़कंप सा छा गया हैं। जब से "व्हाट्सअप" ने यह पॉलिसी लायी हैं तबसे "व्हाट्सअप" का दूसरा पर्याय ढूंढ़ने लगे हैं। इस बिच टेस्ला के संस्थापक का ट्वीट ने तो "सिग्नल "आप को हरी झंडी दिखा दी है। इस बिच लोगों ने "सिग्नल"डाउनलोड करना ही दूसरे विक्लप के रूप में देखने लगे हैं। अब पॉलिसी का विवरण इस तरह से हैं की आप का जो भी डाटा व्हाट्सअप पे सेव हैं, वो फेसबुक पे दिखायेगा अगर ये पालिसी किसी को मान्य नहीं तो आपका व्हटसअप अकाउंट बंद होगा। यह पॉलिसी नहीं बल्कि यह यूजर को चेतावनी दी गयी हैं। व्हाटअप, फेसबुक और इंस्टग्राम का मालिक एक ही हैं।
क्या यह व्हाट्सअप का अंत तो नहीं हैं ? जो ऐप दुनिया पे राज करता रहा हैं, उसका भी अंत तो होता ही हैं। क्या व्हाट्सअप के लिए यह लाल सिग्नल तो नहीं। जो नया सिग्नल की जो सिग्नल को हरा करा कर उसका रास्ता साफ हो गया। कुछ हो या ना हो लेकिन इस पॉलिसी से लोग दूसरा विकल्प ढूंढ़ने लगे हैं।
शनिवार, 18 नवंबर 2017
गुजरात का "टेम्पल रन"...

टेम्पल रन जो गेम हैं वो रागा और नमो के बिच में था। लेकिन नमो इसमें शामिल नहीं हैं। जो भी ज्यादा टेम्पल रन करेगा उसे ज्यादा पॉइंट्स यानि वोट मिलने वाले हैं, ऐसी रागा की सोच हैं।
जब चुनाव आयोग ने टेम्पल रन का बटन दबाया तो रागा ने रन करते करते इन मंदिरों से गुजर रहा था। टेम्पल रन की शुरुआत की। रन... रन... द्वारकाधीश मंदिर, ... रन... रन... कागवाड में खोडलधाम, रन...रन ... विरपुर के जलाराम मंदिर, रन...रन ...चोटिला टेंपल रन...रन ... राजकोट में दासी जीवन टेंपल भी पार करते हुए पहला पड़ाव पार कर गए। अब दूसरे पड़ाव का खेल में रन...रन ... नादियाड के शांताराम मंदिर, रन...रन ...खेड़ा के रणछोड़ राय मंदिर रन...रन ... भाठीजी महाराज मंदिर, रन...रन ... पावगढ़ में महाकाली माता मंदिर पार कर गए।
तीसरे पड़ाव के खेल में उन्होंने दक्षिण गुजरात को पार करते करते रहें। रन...रन ...नवसारी मेंरन..रन...रन ..रन ... उनई माता मंदिर गए। टेम्पल रन में दौड़ते दौड़ते गांधीनगर में अक्षरधाम मंदिर रन...रन ...मेहसाणा में बहुचराजी मंदिर,रन...रन ...वलीनाथ मंदिर, रन...रन ...वीर मेघमाया मंदिर रन...रन ... खोडियार मंदिर में भी से होते हुए रन कर रहें हैं।
अब इस टेम्पल रन में कभी "विकास" पीछे पड़ जाता हैं तो कभी हिंदू वोटों का राक्षस। अब आप ही जरा सोचियें क्या "विकास" पागल हो गया है? जी नहीं "विकास" पागल नहीं हुआ हैं। क्यों की "विकास "कैसा हैं यह पलट कर देख नहीं सकते, उन्हें तो सिर्फ रन...रन ... करना हैं। पीछे मुड़कर देखने का वक्त ही कहाँ है ? अगर देखे तो "विकास" रनर को निगल जाएगा और टेम्पल रन गेम का समापन होगा।
रविवार, 1 अक्टूबर 2017
नम्मा मेट्रो में हिंदी भाषा नहीं चाहियें ...
हमें इस्कॉन टेम्पल जाना था, इस लिए हमने "बायापनहल्ली" से "सैंडलवुड सोप फैक्ट्री "स्टेशन जाना था जो की इस्कॉन के नजदीक का रेलवे स्टेशन हैं। सिर्फ बीच में मैजेस्टिक में रूट बदलना होता हैं।
जाते समय मैं एक अनुभव महसूस किया जो की हिंदी अनाउसमेंट बंद हो चुका था, मुझे अब भी याद हैं की जब मैं पहली बार मेट्रो में सफर किया था तब तो हिंदी में अनाउसमेंट होता था जैसा की "अगला स्टेशन स्वामी विवेकानंद रोड हैं", मैं मन ही मन सोचा था की सिर्फ "अगला स्टेशन स्वामी विवेकानंद रोड " सिर्फ इतना ही काफी हैं।
अब तो हिंदी पूरी तरह बंद हो चुकी थी हर स्टेशन पर हिंदी के नेम प्लेट हटा दिए गए हैं, और कुछ जगह हिंदी नाम मिटा दिया गया हैं । क्या हम किसी भी भाषा की लिपि को मिटा सकते हैं, लेकिन मन से नहीं, समाज से नहीं या देश से नहीं। हिंदी तो देश की भाषा हैं हम सबको सीखना चाहियें, किसी भी भाषा का अनादर क्यों ?
हम जिस प्रान्त में रहते हैं वहाँ की भाषा का आना जरुरी हैं, लेकिन किसी अन्य भाषा को मिटाकर नहीं।
ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಕನ್ನಡವೇ ಆಢಳಿತ ಭಾಷೆ = कर्नाटकमें कन्नड़ ही अटूट भाषा।
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